🧼 एक छोटा-सा साबुन
एक छोटा-सा साबुन, देखने में साधारण लगता है, लेकिन उसके बिना हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी अधूरी है। सुबह उठते ही उसी साबुन से हम अपने हाथ और चेहरे साफ़ करते हैं। साबुन न अमीर देखता है, न गरीब। वह किसी में भेदभाव नहीं करता। जो भी उसके पास आता है, उसे साफ़ कर देता है। ख़ास बात यह है कि दूसरों को साफ़ करते-करते साबुन खुद धीरे-धीरे घुल जाता है। वह हमें यह सिखाता है कि अच्छा बनने और दूसरों के काम आने के लिए कभी-कभी खुद को थोड़ा कम करना पड़ता है। एक छोटा-सा साबुन हमें सफ़ाई के साथ-साथ त्याग और सेवा का पाठ भी पढ़ाता है।